उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ टू गौरीफंटा… नेचर-वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए UPSRTC की पहल, कैसरबाग बस स्टेशन से चलेगी विशेष AC बस

लखनऊ। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में हाल ही में जन्मे एक सींग वाले गैंडे के शावक इन दिनों पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। बढ़ती पर्यटक रुचि और बेहतर आवागमन सुविधा को ध्यान में रखते हुए लखनऊ के कैसरबाग बस स्टेशन से संचालित विशेष एसी 2×2 बस सेवा को अब दुधवा से आगे अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप स्थित गौरीफंटा तक विस्तारित कर दिया गया है। इससे पहले यह सेवा केवल दुधवा तक सीमित थी और मुख्यतः नेचर व वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए संचालित होती थी।

शुक्रवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह पहल यूपीएसआरटीसी, उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड और वन विभाग के समन्वय से की गई है। उन्होंने कहा कि दुधवा, कतर्नियाघाट और गौरीफंटा का पूरा तराई क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। बस सेवा के विस्तार से पर्यटक अब दुधवा के जंगलों के साथ-साथ गौरीफंटा और उससे जुड़े प्राकृतिक क्षेत्रों का भी अनुभव कर सकेंगे। यह सुविधा शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद उपयोगी होगी।

नई समय-सारिणी के अनुसार बस सुबह 8:00 बजे कैसरबाग से रवाना होकर दोपहर 2:00 बजे गौरीफंटा पहुंचेगी। वापसी में बस 2:30 बजे गौरीफंटा से चलकर 3:00 बजे दुधवा पहुंचेगी तथा 3:30 बजे दुधवा से लखनऊ के लिए रवाना होकर रात 9:00 बजे कैसरबाग पहुंचेगी। लखनऊ से दुधवा का किराया Rs487 तथा लखनऊ से गौरीफंटा तक Rs536 निर्धारित किया गया है।

फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व, एच. राजामोहन ने बताया कि ठंड के मौसम में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां बाघ, एक सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण, बारहसिंगा, तेंदुए और हाल ही में जन्मे गैंडे के शावक पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। घने साल वन, विस्तृत घास के मैदान और दलदली क्षेत्र इसे देश के समृद्ध प्राकृतिक आवासों में शामिल करते हैं।

उन्होंने बताया कि दुधवा रिजर्व का हिस्सा कर्तनिया वाइल्डलाइफ सेंचुरी अपनी अनोखी पारिस्थितिकी, नदियों, वेटलैंड्स और दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में गैंडों के रेडियो कॉलर हटाए जाने से संरक्षण कार्यों में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विभाग का मानना है कि दुधवा-गौरीफंटा बस सेवा के विस्तार से सीमा क्षेत्र के जंगलों और वेटलैंड्स में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को नई गति प्राप्त होगी।

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