देशबड़ी खबर

CJI का बिहार दौरा : पटना हाईकोर्ट में बोले सूर्यकांत- न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है

पटना। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्याधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है और इसी समझ के साथ न्याय व्यवस्था को एक समावेशी, सक्षम और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश आज पटना उच्च न्यायालय परिसर में सात अलग अलग भवनों और संरचनाओं का उद्घाटन करने के बाद न्यायधीशों, वकीलों और उच्च अधिकारियों के एक समूह को सबोधित कर रहे थे।

सीजेआई ने कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम मनुष्यों से मिलता है और इसी समझ के साथ हमें एक समावेशी, सक्षम और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र की धरती अनुशासन, तर्क और प्रशासनिक विवेक की प्रतीक रही है। यही वह भूमि है जहाँ से आधुनिक प्रशासन, नैतिकता और लोककल्याण की अवधारणाएँ विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय एक संवैधानिक संस्था के रूप में न केवल संविधान के अंगीकरण का साक्षी रहा है, बल्कि अधिकारों और स्वतंत्रताओं के निरंतर विस्तार की यात्रा का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

सूर्यकांत ने कहा कि सदियों से जो तत्व हमारी संस्थाओं को एक सूत्र में बाँधता है, वह है संस्थागत क्षमता में निवेश-चाहे वह भौतिक संसाधन हों, प्रशासनिक ढाँचा हो या मानव संसाधन। जब हम क्षमता निर्माण की बात करते हैं, तो उसका सीधा संबंध न्याय तक प्रभावी पहुँच से होता है। इसका उद्देश्य ऐसा न्याय तंत्र विकसित करना है जो बढ़ती जनसंख्या, मुकदमों की संख्या और विवादों की जटिलता की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सके।

उन्होंने कहा कि सुदृढ़ और कुशल प्रशासन न्याय प्रणाली की रीढ़ होता है। फाइलों का सुव्यवस्थित संचालन, अभिलेखों का संरक्षण और न्यायिक निर्णयों का प्रभावी प्रबंधन, ये सभी कार्य सामान्य प्रतीत होते हैं, लेकिन इन्हीं से न्यायिक दक्षता सुनिश्चित होती है। जब प्रशासन सुचारु रूप से कार्य करता है, तो न्यायाधीश अपने मूल दायित्वों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और वादकारियों को एक पारदर्शी व भरोसेमंद व्यवस्था का अनुभव होता है।

सीजेआई ने कहा कि आज के समय में प्रौद्योगिकी संस्थागत मजबूती का एक अहम स्तंभ बन चुकी है। डिजिटल, डेटा-आधारित और उपयोगकर्ता-केंद्रित प्रणालियाँ न केवल देरी को कम करती हैं, बल्कि पारदर्शिता बढ़ाती हैं और बुज़ुर्गों, दिव्यांगजनों तथा दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय को अधिक सुलभ बनाती हैं। यही वास्तविक अर्थों में न्याय तक पहुँच है। उन्होंने कहा कि यह भी आवश्यक है कि तकनीक समावेशन का माध्यम बने, न कि बहिष्करण का। इसके लिए गोपनीयता, विश्वसनीयता और डिजिटल असमानताओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि न्याय प्रणाली की आत्मा मानव संसाधन है। प्रशिक्षण, क्षमता विकास और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से ही न्याय व्यवस्था सशक्त बनती है। न्यायालय परिसर को केवल विवाद निपटारे का स्थान नहीं, बल्कि शिक्षा, संवाद और सहयोग का केंद्र भी बनना चाहिए। साथ ही, यह स्वीकार करना होगा कि न्याय प्रणाली से जुड़े सभी लोगों का शारीरिक और मानसिक कल्याण भी न्याय का अभिन्न अंग है। सूर्यकांत ने इतिहास की याद दिलाई और कहा कि चंपारण से मिली सीख हमें एक सशक्त स्मरण कराती है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्मरण बताता है कि हमें सबसे बुलंद नहीं, बल्कि सही आवाज़ सुननी चाहिए।

उन्होंने कहा कि संस्थानों को उन लोगों से निरंतर जुड़ा रहना चाहिए, जिनकी वे सेवा करते हैं। इस बात की अपेक्षा है कि न्यायालय संविधान निर्माताओं की बुद्धिमत्ता से प्रेरित रहे और अपने प्रत्येक निर्णय में गहन सार्वजनिक कर्तव्यबोध को प्रतिबिंबित करता रहे। सीजेआई ने आज उच्च न्यायलय परिसर में एडीआर भवन, ऑडिटोरियम, आईटी भवन, प्रशासनिक ब्लाक, मल्टी लेवल कार पार्किंग, हॉस्पिटल, आवासीय काम्प्लेक्स, एडवोकेट जेनरल ऑफिस का उद्घाटन और गया में जजों के लिए बने गेस्ट हाउस का ई- उद्घाटन किया।

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायधीश राजेश बिंदल, पटना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह सहित पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मौजूद थे। इस कार्यक्रम से उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्याधीश संगम साहू वर्चुअल माध्यम से जुड़े हुए थे। कार्यक्रम में बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही भी उपस्थित थे। समरोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन पटना उच्च न्यायालय के न्यायधीश राजीव रंजन प्रसाद ने किया।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button