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मैग्नीशियम की कमी से बेचैनी, अनिद्रा और बढ़ी हुई धड़कन होती है? जानें नेचुरल सोर्स

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और अनियमित खान-पान के कारण शरीर में कई पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। लापरवाही भी एक बड़ी वजह है। शरीर को रोजाना जिन पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है, उनमें मैग्नीशियम बेहद महत्वपूर्ण है, जिसे ‘मास्टर मिनरल’ या ‘नेचुरल कैल्मिंग मिनरल’ भी कहा जाता है।

मैग्नीशियम 300 से ज्यादा जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में इसे वात-पित्त शांत करने वाला और पाचन शक्ति बढ़ाने वाला तत्व माना जाता है। जानकारी के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी इसकी कमी से जूझ रही है।

शरीर को स्वस्थ रखने में मैग्नीशियम का अहम योगदान है। यह नसों और दिमाग को शांति देता है, सेरोटोनिन और गाबा जैसे केमिकल्स को सपोर्ट करता है। यह दिल की धड़कन स्थिर रखता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है, शरीर की एनर्जी बढ़ाने में मदद करता है और ब्लड शुगर बैलेंस रखता है।

शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी हो तो वे संकेत देने लगते हैं, ऐसे में मैग्नीशियम की कमी के लक्षण में लगातार थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, बेचैनी, चिंता, अनिद्रा, अनियमित धड़कन, हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, कब्ज, डायबिटीज की समस्या का बढ़ना और महिलाओं में मूड स्विंग्स और पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द और ऐंठन शामिल हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि महिलाओं और पुरुषों को प्रतिदिन कितने मैग्नीशियम की जरूरत पड़ती है। पुरुषों के लिए 400 से 420 एमजी (मिलीग्राम), महिलाओं के लिए 310 से 320 एमटी और गर्भवती महिलाओं के लिए 350 से 360 एमजी की जरूरत पड़ती है।

मैग्नीशियम के प्राकृतिक स्रोतों पर नजर डालें तो यह कद्दू के बीज, बादाम, काजू, पालक, मूंगफली, काली बीन्स, डार्क चॉकलेट, केला, ओट्स और एवोकाडो में भरपूर मात्रा में मिलता है। इसका अवशोषण बढ़ाने के लिए विटामिन बी6 के साथ लें, रात में मैग्नीशियम युक्त भोजन खाएं, चाय-कॉफी कम करें।

इसके साथ ही खिचड़ी में घी और पालक बीज या साग डालकर खाएं। इन सरल उपायों से शरीर स्वस्थ और मन शांत रहेगा। हालांकि, लक्षण ज्यादा दिखने और आराम न मिलने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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