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आत्मनिर्भर भारत व नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक और चरण – चार श्रम संहिताएं

  • श्रमिकों के जीवन में आएगा नया सूर्योदय

मृत्युंजय दीक्षित


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार श्रम सुधारों की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। नयी श्रम संहिताएँ इन्हीं सुधारों का अगला चरण हैं जिनका श्रमिक संगठनों की ओर से व्यापक स्वागत किया जा रहा है। यह चार नए श्रम सुधार व्यापक और सर्वहितकारी हैं। श्रमेव जयते की भावना से कार्य करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से श्रमिक वर्ग का सम्मान और उनके लिए सुविधाएं दोनों ही लगातार बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं हर महत्वपूर्ण समारोह में श्रमिकों का सम्मान करते हैं फिर चाहे वो अयोध्या में दिव्य – भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हो या नए संसद भवन या फिर दिल्ली स्थित भारत मंडपम का उद्घाटन। मोदी सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओें के माध्यम से श्रमिक वर्ग के लिए सामाजिक सुरक्षा , समय पर वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। यह नई संहिताएं श्रमिक वर्ग के लिए बेहतर और लाभकारी अवसरो के लिए एक सशक्त नींव बनाएंगी। श्रमिकों के लिए पहली बार वेतन संहिता 2019,औद्योगिक संबंध संहिता 2020 व व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 लागू करने की महती घोषणा की गई है।

महिला कर्मचारियो के लिए पहली बार व्यापक संहिता – चार नई श्रम संहिताओं में पहली बार महिलाओ के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।भारत के श्रम इतिहास में पहली बार महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षा के साथ सभी क्षेत्रों में रात्रि पाली में काम की छूट तथा परिवार की परिभाषा में उन्हें अपने सास -ससुर को भी जोड़ने का अवसर दिया गया है। नई श्रम संहिता के अनुसार महिलाएं खनन सहित सभी उद्योगो में काम कर सकेंगी। इस कदम से महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे यद्यपि ऐसे कार्यों में उनकी नियुक्ति उनकी इच्छा से ही कि जाएगी। नए कानून में महिला श्रमिको को बराबरी का दर्जा दिया जा रहा है। सहमति से और अनिवार्यतः सुरक्षा के साथ वह रात की पाली में भी काम कर सकेगी।पहली बार समान काम समान वेतन सहित 26 सप्ताह का वेतन सहित मातृत्व लाभ तथा शिशु पालन संहिता के अंतर्गत घर से काम करने की सुविधा भी दी जा रही है। गिग वर्कर्स के लिए पहल – नई श्रम संहिता में गिग और प्लेटफार्म यानी रैपिडो, जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर से जुड़े कामगारो को भी पारिभाषित किया गया है। चार श्रम संहिताओे में वर्तमान 29 कानून को भी समाहित कर लिया गया है।

नए श्रम कानूनों में पहली बार युवा श्रमिकों को अवकाश के दिनों का भी वेतन मिलेगा तथा सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी जा रही है। नियुक्त पत्र अनिवार्य करने से सामाजिक सुरक्षा रोजगार विवरण को बढ़ावा मिलेगा। नए श्रम कानूनों से अब नियोक्ता मजदूरों का शोषण नहीं कर सकेंगे। नए श्रम कानूनों में निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों को स्थायी जैसे लाभ जिसमें सामाजिक सुरक्षा कवर, चिकित्सा सवेतन अवकाश सहित समस्त लाभ मिलेंगे। इलेक्ट्रानिक मीडिया, डिजिटल कामगारों को भी इन कानूनों का लाभ मिलेगा। नई श्रम संहिताएं 45 दिनों के अंदर ही लागू हो जाएंगी।

नयी श्रम संहिता, श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार होने के साथ साथ बदलती श्रम आवश्यकता को भी संबोधित करती है। श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों के लिए समान अवसर और गिग व संगठित कामगारों के लिए कानूनी पहचान सुनिश्चित करने वाली ये चारो संहिताएं उनके जीवन स्तर में सुधार लाएंगी। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्चपूर्ण कदम है । विशेषज्ञों का मत है कि यह कानून 2047 तक विकसित भारत के नए लक्ष्य को गति प्रदान करेंगे। श्रम सुधारों का उद्योग जगत ने व्यापक स्वागत किया है। इन सुधारों से श्रमिकों की दशा बदलेगी और उनके जीवन में भी व्यापक बदलाव आएगा। महिलाओं को रात की पाली मे काम करने की अनुमति मिलना सरकार का कानून व्यवस्था पर आत्मविश्वास दर्शाता है।नए सुधारों से अब औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ही लघु उद्योगों में भी वृद्धि होगी। नए श्रम कानूनों के कारण अब पुराने के साथ ही नए उद्योगों का भी विकास होगा। नई श्रम संहिताएं श्रमिको के जीवन में नया सूर्योदय लेकर आने वाली हैं।

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